स्थानीयअयोध्या नगरी हाता मैदान में सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव का समापन सोमवार को हुआ

पञ्चकल्याणक महोत्सव का समापन स्थापित भगवान् संसार से मुक्त हो सिद्ध लोक मे विराजे
पञ्च ऋषिराज का मिला आशीष श्रद्धालु हुये भाव विभोर
हुए श्रद्धालु
जगदलपुर
स्थानीयअयोध्या नगरी हाता मैदान में सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव का समापन सोमवार को हुआ। यहां स्थापित भगवान जो अभी तक संसार में थे अब संसार से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त कर सिद्ध लोक में विराजमान हो गए। अभी तक भगवान की सांसारिक दशा ही चल रही थी लेकिन आज वे सुख से परिपूर्ण होकर संसार के सभी दुखों सें मुक्त होकर मोक्ष कल्याणक से युक्त होकर परम सुख को प्राप्त कर लिया। सोमवार की सुबह 8 बजे भगवान के मोक्ष कल्याणक का नाट्य रूप में दर्शन कर भक्तों ने अपने आपको दर्शन कर धन्य किया और प्रभु की भक्ति भाव से पूजा अर्चना की।
उन्होंने भक्तों को अपनी दिव्य ध्वनि से यही बताया कि संसार में केवल दुख ही दुख है और हमारी आत्मा ही हमें सच्चा सुख प्रदान कर सकती है जिसकी प्राप्ति के लिए संसार शरीर और भोगों से अलग होना पड़ता है तभी जीवन में सच्चे सुख की प्राप्ति हो सकती है। आयोजन के अंतिम दिन हाता मैदान में भगवान की दिव्य मूर्ति को 5 रथों पर विराजमान कर मैदान की सात परिक्रमा की जिसमें प्रतिष्ठित मूर्तियों को इंद्र एवं इंद्राणी द्वारा सम्मान के साथ रथ से उठाकर वापस मैदान पर बने विशाल मंच पर लाया गया।
आयोजनके अंतिम दिन मोक्ष कल्याणक के बाद मुनिश्री योग सागरजी, शैल सागरजी, सौम्य सागरजी, दुर्लभ सागरजी एवं विनम्रसागर जी महाराज के मुख वचन से श्रद्धालु भावविभोर हुए। मुनिश्री ने कहा कि इस महोत्सव से जगदलपुर का नाम बस्तर तक सीमित नहीं रहा बल्कि जगदलपुर का नाम पूरे विश्व के 170 देश में हो गया है।
सुनिश्चित स्थानों पर विराजित की जाएंगी प्रभु की मूर्तियां
पंचकल्याणकमहोत्सव में प्राण प्रतिष्ठा की गईं भगवान महावीर की मूर्तियां कोंडागांव, गीदम, सोनारपाल नवरंगपुर में विराजित की जाएंगी। बस्तर का नाम इसलिए स्वर्ण अक्षरों में अंकित हो गया है कि अन्य स्थान की मूर्तियों को स्थानीय समाज में पैसों के अभाव में जगदलपुर सकल जैन समाज द्वारा प्राण प्रतिष्ठा करने का निर्णय लिया गया था।
मूर्तियों का हुआ जलाभिषेक
मैदानमें परिक्रमा के बाद पंचकल्याणक मंच पर सौ से अधिक इंद्र-इंद्राणियों ने मंत्रोच्चार के साथ भगवान महावीर का जलाभिषेक किया। इस अवसर पर भोपाल से पहुंचे प्रतिष्ठाचार्य जय कुमार शास्त्री एवं अजीत शास्त्री का सम्मान सकल जैन समाज द्वारा किया गया।

स्वर्ण रथ पर भगवान महावीर के साथ हाता मैदान में 7 परिक्रमा की गई
रथ मे विराजित श्रीजी

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